Friday, 17 May 2019

कहानी :- क्रोध और नियंत्रण

।। क्रोध और नियंत्रण ।।
एक राजा घने जंगल में भटक गया । कई घंटों के बाद वह प्यास से व्याकुल होने लगा । तभी उसकी नजर एक वृक्ष पर पड़ी जहां एक डाली से टप टप करती पानी की छोटी - छोटी बूंदें गिर । रही थीं । राजा ने पत्तों का दोना बनाकर पानी इकट्ठा किया । राजा जैसे ही पानी पीने लगा एक तोता आया और झपट्टा मार दोने को गिरा दिया । राजा खाली दोने को फिर भरने लगा । काफी देर के बाद वह दोना फिर भर गया । राजा ने हर्षचित्त होकर जैसे ही दोने को उठाया तो तोते ने वापस उसे गिरा दिया । राजा ने चाबुक उठाकर तोते पर वार किया और उसके प्राण निकल गए । राजा ने सोचा अब मैं पानी इकट्ठा कर अपनी प्यास बुझा पाऊंगा । यह सोचकर वह डाली के वापस पानी इकट्ठा होने वाली जगह पहुंचा तो उसके पांव के नीचे की जमीन खिसक गई । उस डाली पर एक जहरीला सांप सोया हुआ था और उस सांप के मुंह से लार टपक रही थी राजा जिसको पानी समझ रहा था वह सांप की जहरीली लार थी । राजा का मन ग्लानि से भर गया । उसने कहा काश मैंने संतों के बताए उत्तम क्षमा मार्ग को धारण कर क्रोध पर नियंत्रण किया होता तो ये मेरे हितैषी निर्दोष पक्षी की जान नहीं जाती ।


शिक्षा :- क्रोध पर नियंत्रण रखे।


---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- अच्छी नहीं अति




।। अच्छी नहीं अति ।।

एक दार्शनिक के पास लोग आकर अपने पारिवारिक जीवन की समस्याएं बताकर समाधान पूछा करते थे । दार्शनिक सबको समान भाव से सलाह देते । एक बार एक व्यक्ति अपनी पत्नी को साथ लेकर आया और दार्शनिक से पत्नी के आलस्य व कंजूसी की निंदा करने लगा । दार्शनिक ने उस औरत को स्नेह से बुलाया । उन्होंने एक मुट्ठी बंद करके औरत के सामने कर दी और पूछा , ' यह हमेशा ऐसी रहे तो क्या होगा ? औरत बोली - हमेशा यह हाथ ऐसा रहा तो अकङ्कर निकम्मा हो जाएगा । ' औरत का उत्तर सुन दार्शनिक ने दूसरा हाथ खोलकर उसकी ओर बढ़ाया और पूछा - ' यह हाथ हमेशा ऐसे ही खुला रहे तो क्या होगा ? ' औरत बोली - ' तब भी यह अकड़ जाएगा । ' दार्शनिक बोले ' यह तो बुद्धिमान भी है और दूरदर्शी भी । ' यह खुद ही सबकुछ जानती है । उन्होंने औरत से कहा - ' बेटी , तुम सबकुछ समझती ही हो तो अपनी समझ का प्रयोग अपने जीवन में भी करो । इससे तुम्हारा सौभाग्य बढ़ेगा । किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं है । न तो खुला हाथ अच्छा है , न ही बंद हाथ । । दोनों में संतुलन होना चाहिए । न तो लापरवाही से खर्च करो न ही बहुत कंजूसी से ही । ' औरत दार्शनिक का संदेश समझ गई थी ।


शिक्षा :- किसी भी चीज की अति करने से बचे और संतुलन बनाकर रखे।



------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- सोच कर बोले




।। सोच कर बोले ।।

एक बार एक किसान की अपने पड़ोसी से जमकर लड़ाई हुई । किसान ने पड़ोसी को बहुत भला - बुरा । कहा और जमकर कोसा। बाद में जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो पछताने लगा । इसी पछतावे के साथ वह एक साधु के पास पहुंचा । साधु से किसान बोला , ' मैं अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूं । मुझे बहुत ग्लानि हो रही है । मैं क्या करूं ? ' किसान की बात सुनकर साधु महाराज ने उसे पंखों से भरा एक थैला दिया और बोले , ‘ जाओ इसे शहर के बीचोंबीच जाकर उड़ा दो । ' किसान ने ऐसा ही किया और साधु के पास लौट आया । साधु ने अब कहा , ' जाओ , अब जितने भी पंख उड़ाए हैं , उन्हें वापस बटोर कर लाओ। ' नादान किसान जब ऐसा करने पहुंचा तो उसे पता चला कि यह काम मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है । खाली थैला हाथ में लिए वह साधु के पास लौट आया । उसने साधू को सारी बात बताई । साधु ने उसकी पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद उससे कहा , ' देखो , जैसा इन पंखों के साथ हुआ है , ऐसा ही मुंह से निकले हुए शब्दों के साथ भी होता है । इसलिए किसी के बारे में भी भला - बुरा बोलने से पहले कई बार सोच लो ताकि पंख उड़ जाने वाली स्थिति न पैदा हो । '


शिक्षा :- हमें सोच समझकर ही बात करनी चाहिए ताकि बाद में पछतावा न हो ।


---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- ईमानदारी का है बड़ा महत्व




।। ईमानदारी का है बड़ा महत्व ।।

एक राजा के घर कोई संतान नहीं थी । वह किसी योग्य युवक को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था । उसने शहर में घोषणा करवाई कि राज्य के सभी युवक राजमहल आएँ । राजा उनकी एक परीक्षा लेंगे । जो भी युवक सबसे ज्यादा योग्य पाया जाएगा , उसे राज्य का कार्यभार संभालने के लिए चुना जाएगा । अगले दिन शहर के बहुत से युवक राजमहल पहुंच गए । राजा ने उन सभी को एक - एक थैली में बीज दिए और कहा कि इन बीजों को अपने घरों में जाकर  बो देना । पंद्रह दिन तक इनमें से पौधे निकल आएंगे । तब उन पौधों को लेकर राजमहल आना । उनकी वृद्धि देखकर उत्तराधिकारी का फैसला किया जाएगा । सभी युवक बीज लेकर चले गए और अपने - अपने घरों में बो दिए । सभी के घरों में पौधे उगने लगे थे लेकिन एक युवक के बीजों से अंकुर तक न फूटा था । बाकी लोगों के पौधे तेजी से बढ़ते देख वह दुखी हो गया । फिर भी अंतिम दिन वही गमला ले गया । राजा ने सबके हरे - भरे पौधे देखे और उसका खाली गमला भी । इसके बाद राजा ने खाली गमले वाले इस युवक को चुन लिया , क्योंकि राजा ने वे बीज उबालकर दिए थे , जिनसे कुछ उग ही नहीं सकता था ।


 शिक्षा :- जीवन में ईमानदारी बरतें । इससे अच्छे ही परिणाम मिलेंगे ।



---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- रचना ईश्वर की



।। रचना ईश्वर की ।।
किर्चनर बहुत बड़े खगोल शास्त्री  थे । उनके बारे में एक कहानी प्रचलित है । उनका एक नास्तिक मित्र था । वह हमेशा कहता था कि मैं ईश्वर में विश्वास नहीं करता । दोस्त को समझाने के लिए उन्होंने एक सरल तरीका सोचा । उन्होंने पृथ्वी का एक नमूना ग्लोब बनवाया और उस मित्र को चाय पर आमंत्रित किया । जब उनका मित्र आया तो उसका ध्यान सबसे पहले मेज पर रखे ग्लोब पर गया । किर्चनर उसे उंगलियों से नचाकर आनंद ले रहे थे । मित्र ने कहा - सुंदर है । किसने बनाया ? किर्चनर ने कहा - यह अपने आप बन गया । मित्र हंसने लगा । किर्चनर ने कहा - तुम इसलिए हंसे , क्योंकि मैंने बेतुकी बात कर दी । तुम्हारा हंसना ठीक है । जरा सोचो कि किस बात पर विश्वास करना अधिक सरल होगा , यह छोटा सा ग्लोब खुद बन गया होगा या इसे किसी ने बनाया होगा ? तुम्हें लगता है कि यह ग्लोब अपने आप नहीं बन सकता तो फिर यह सोचो कि यह विशाल ग्लोब , जिस पर हम रहते हैं , यह भी अपने आप कैसे बना होगा ? जब तक मानव अपनी आंखों से नहीं देख लेता , तब तक उसे विश्वास करना कठिन लगता है । चारों ओर चमत्कार भरे पड़े हैं । पर हम किसी प्रकार की उथल पुथल महसूस नहीं करते । मित्र को किर्चनर की बात समझ आ गई थी ।


 शिक्षा :- यह दुनिया रहस्यों से भरी हुई है ।



---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- बुद्धि की जीत


।। बुद्धि की जीत ।।
एक बार एक विद्वान और एक धनवान थे । दोनों दो मित्र थे । एक बार दोनों में बहस छिड़ गई । धनवान का कहना था कि पैसे से हर मुश्किल आसान हो जाती है , जबकि विद्वान का मानना था कि बुद्धि द्वारा हर मुश्किल को हल किया जा सकता है । उसी समय वहां का राजा उधर से गुजरा । दोनों ने ही राजा को नहीं देखा और न ही उसका अभिवादन किया । राजा बहुत घमण्डी था । गुस्से में आकर उसने दोनों को गिरफ्तार करवा लिया और उन्हें मृत्युदण्ड का हुक्म सुना दिया । दोनों को ही कारागार में डाल दिया । धनवान ने कारागार के रक्षकों को अपने धन का प्रलोभन देकर छूटने की बहुत कोशिश की , लेकिन सफलता नहीं मिली । अब विद्वान ने कहा , ' जैसा मैं कहता हूं वैसा ही करो , शायद प्राण बच जाएँ । ' अब उसके कहे अनुसार दोनों ही जोर - जोर से चिल्लाने लगे - पहले मुझे फांसी दो , पहले मुझे फासी दो । शोर सुनकर राजा वहां आ पहुंचा और पूछने लगा कि तुम एक दूसरे से पहले क्यों मरना चाहते हो ? विद्वान बोला इस मुहूर्त में मरने वाले को स्वर्ग प्राप्त होगा इसलिए । राजा मूर्ख भी था , कहने लगा मैं तुम्हारा राजा हैं , इसलिए स्वर्ग पर पहला हक मेरा है । उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया । कि उसे ही फांसी पर लटका दो । इस प्रकार दोनों की जान बच गई ।

शिक्षा:-धन की बजाय बुद्धि द्वारा हर विपत्ति से बचा जा सकता है ।


---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- जीने का हक़


।। जीने का हक़ ।।
 एक राजा कई मुसीबतों से घिर गए । उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इन आपदाओं को कैसे दूर करें ? वह रात - दिन चिंता में डूबे रहते । तभी एक दिन उनकी मुलाकात एक तांत्रिक से हुई । उन्होंने तांत्रिक को अपनी आपदाओं के बारे में बताया तो उसने राजा से कहा , ' संकटों से मुक्ति तभी मिलेगी , जब आप पशुओं की बलि चढ़ाएंगे । ' राजा ने उस तांत्रिक की बात पर विश्वास कर लिया और बलि देने की योजना बना ली । एक विशेष अनुष्ठान भी आयोजित करा लिया गया । बलि के लिए एक भैंसे को भी बांधकर खड़ा कर लिया गया । तभी संयोगवश गौतम बुद्ध वहां से गुजरे । उन्हें मूक पशु को मौत की प्रतीक्षा करते देखा तो उनका हृदय करुणा से भर उठा । उन्होंने राजा को एक तिनका देते हुए कहा , ‘ राजन , इस तिनके को तोड़कर दिखाएं । ' राजा ने फौरन तिनका तोड़ दिया । फिर उन्होंने राजा से उस तिनके को जोड़ने के लिए कहा । राजा ने कहा कि यह तिनका दोबारा कैसे जुड़ सकता है ? बुद्ध बोले , ' राजन , जब आप टूटा तिनका भी जोड़ नहीं सकते तो निरीह प्राणी की हत्या के बाद उसे जीवित भी नहीं कर सकेंगे । ' निरीह प्राणी को भी जीने का हक है । समस्याएं सुलझाने के लिए बुद्धि और साहस का प्रयोग करें । बुद्ध की बात सुन लज्जित राजा ने पशुवध बंद करवा दिए ।

शिक्षा :-पशुओं पर करुणा रखें ।


---------------------------------------------------------------------------------

कहानी :- ऐसा हो बर्ताव

।। ऐसा हो बर्ताव।।
एक बार एक दर्जी था ।उसका एक ही बेटा था ।नाम था राहुल ।दर्जी ने उसे बड़े लाड़ प्यार से पाला , उसकी हर इच्छा पूरी की ।पढ़ाया - लिखाया और बहुत धूमधाम से उसकी शादी भी कर दी ।कुछ समय बाद दर्जी दादा भी बन गया ।राहुल के घर सुंदर सा बेटा हुआ ।धीरे धीरे वह बड़ा होने लगा ।पुत्र मोह ।में फंस कर अब राहुल और उसकी पत्नी अपने पिताजी के प्रति लापरवाह होते गये ।यहां तक कि उसके खाने पीने व नित्य प्रति की जरूरतों की ओर भी अब उनका ध्यान नहीं रहा ।धीरे धीरे घर में कलह का वातावरण बन गया ।रोजाना झगड़े होने लगे ।हद तो ।तब हो गई , जब पत्नी के कहे में आकर ।राहुल ने अपने पिता को घर के गैराज में रहने को मजबूर कर दिया ।उस को मिट्टी के बर्तन में खाना देने लगे ।ये सब उनका चार वर्षीय पुत्र रोजाना देखता ।एक दिन वह अपने पिता के साथ बाजार गया और मिट्टी का बर्तन खरीदने की जिद करने लगा ।राहुल ने पूछा , ' तुम क्या करोगे इसका ?' पुत्र बोला , ' जब आप बूढ़े हो जाएंगे तो आप को इसमें खाना दूंगा ।' यह सुनकर राहुल को जोर का धक्का लगा ।उसने तुरंत घर पहुंचकर अपने पिताजी से अपने किए की क्षमा मांगी ।

 शिक्षा :- ऐसा व्यवहार किसी से मत करो जो आप अपने लिए नहीं चाहते ।

---------------------------------------------------------------------------------

जैसे को तैसा

एक स्थान पर जीर्णधन नाम का बनिये का लड़का रहता था । धन की खोज में उसने परदेश जाने का विचार किया । उसके घर में विशेष सम्पत्ति तो थी नहीं, केव...