Monday, 13 April 2020

कहानी :- शिक्षा का महत्त्व

।। शिक्षा का महत्त्व ।।
एक संत कहीं जा रहे थे । रास्ते में उन्होंने देखा कि एक वृद्ध सज्जन अपने हाथ में चिट्ठी लिए घूम रहे थे और सबसे उसे पढ़ने का निवेदन कर रहे थे । मगर लोग अपने - अपने कामों में इतना व्यस्त थे कि उस वृद्ध की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा था । चिट्ठी पढ़ना तो बहुत दूर की बात थी । एकाध व्यक्ति ने देखा भी तो मुंह बनाकर चला गया । वृद्ध की हालत देख संत से रहा नहीं गया । वह उसके पास पहुंचकर उससे बात करने लगे । वृद्ध ने उनसे भी चिट्ठी पढ़ने का अनुरोध किया । संत के साथ उनके एक शिष्य भी वहीं मौजूद थे । संत का संकेत पाकर शिष्य ने वृद्ध को चिट्ठी पढ़कर सुनाई । चिट्ठी पढ़वाने के बाद जब वृद्ध जाने लगा तो संत ने पूछा , ' बाबा , आप अपने घर के बच्चों को स्कूल भेजते हो या नहीं ? अगर आप अपने बच्चों को अभी भी नहीं पढ़ाएंगे तो भविष्य में आप ही की तरह उन्हें भी चिट्ठी पढ़वाने के लिए लोगों की मिन्नतें करनी पड़ेंगी । ' संत की बातें सुनकर वृद्ध ने कहा , ' महाराज , आज आपने मेरी आंखें खोल दी हैं । आपने मुझे शिक्षा की अहमियत बता दी है । मैं अपने बच्चों को तो पढ़ाऊंगा ही , साथ ही खुद भी पढ़ने की कोशिश करूंगा । ' इस पर संत ने कहा , ' आपका फैसला नेक है । पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती । ' 
शिक्षा :- पढ़ना - लिखना बेहद जरूरी है ।

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