Monday, 13 April 2020

मीठी हो बोली

।। मीठी हो बोली ।।
 एक आदमी का स्वभाव बड़ा चंचल था । उसकी वाणी भी कर्कश थी । वह सबके साथ कठोर व्यवहार करता । छोटे - बड़े किसी का लिहाज नहीं । परिणाम वही हुआ , जो होना चाहिए था । सबके मन में उसके लिए कटुता पैदा हो गई । वह जिधर जाता , लोग उससे मुंह फेर लेते । उसके तने हुए चेहरे से लोगों के मन में उसके लिए तिरस्कार पैदा हो गया । वह यह सब देख दुखी होता लेकिन बेचारा अपने स्वभाव से लाचार था । अप्रिय शब्द बोलने और कड़वी भाषा का प्रयोग करने से वह खुद को रोक नहीं पाता था । एक दिन एक साधु आए । वह उनसे मिलने गया और बोला , ' यह दुनिया बहुत बुरी है । इसने मुझे बहुत सताया है कि मैं आपको कुछ कह भी नहीं सकता । ' उस व्यक्ति के चेहरे की कठोरता देख व तीखी वाणी सुन संत समझ गए कि उसे रोग क्या है । वे उससे बोले , ' दीपक में रुई की बाती डालो , इसमें पानी भरो और फिर जलाओ । ' यह सुनकर आदमी हैरान हुआ कि साधु ऐसा क्यों कह रहे हैं । फिर सोचा कि शायद कोई चमत्कार हो । उसने ऐसा ही किया लेकिन बाती नहीं जली । साधु ने कहा , ' पगले जब तक दीए में स्नेह या तेल नहीं पड़ेगा तो यह जलेगा कैसे ? तुम्हारे दीए में पानी पड़ा है । इसे फेंककर इसमें स्नेह भरो । वह आदमी संत की बात का अर्थ समझ गया था । 

शिक्षा :- हमेशा मीठी वाणी ही बोलें ।

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